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Monday, July 1, 2019

Jagannath Puri Rath Yatra 2019 Essay in Hindi, Drawing, Quotes & History.

Jagannath Puri Rath Yatra 2019 (जगन्नाथ रथ यात्रा 2019) Essay in Hindi, Drawing, Quotes & History: True Tech News.

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Jagannath Puri Rath Yatra या रथ यात्रा (Ratha Yatra), भारत का प्रसिद्ध है जो जगन्नाथ यात्रा से जुडा हुआ है और यह प्रसद्ध तरीके से पूरी, ओडिशा, भारत में मनाया जाता है। रथ यात्रा दर्शन भारत के साथ-साथ दुसरे देशों में भी मनाया जाता है। इस भव्य त्यौहार को भारत के राष्ट्रीय चैनल दूरदर्शन चैनल पर सीधा प्रसारण किया जाता है।

Jagannath Puri Rath Yatra 2019 Essay in Hindi.



Odisa राज्य में यह त्यौहार सबसे साहित्यिक है और 10-11 सदियों से लोग इसे मानते चले आ रहे हैं। इसकी सम्पूर्ण जानकारी ब्रह्म पुराण में, पद्म पुराण में, स्कन्दा पुराण में तथा कपिला समिथा में वर्णित है। हर साल रथ यात्रा अषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष द्वितीय के दिन मनाई जाती है।
इस भव्य त्यौहार को मनाने के लिए पुरे विश्व भर से लोग जगन्नाथ पूरी (Puri) पहुँचते हैं। मान्यताओं के अनुसार ऐसा मन जाता है की रथ यात्रा त्यौहार के दिन भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और छोटी बहन सुभद्रा के रथ को श्रद्धालु खिंच कर मुख्य मंदिर जगन्नाथ मंदिर से उनकी मौसी के घर गुंडीचा मदिर ले कर जाते हैं। वहाँ तीनो रथ 9 दिन तक रहते हैं। उसके बाद इन तीनो रथ की रथ यात्रा वापस अपने मुख्य जगन्नाथ मंदिर जाती है जिसे बहुडा जात्रा कहा जाता है।

बहुत ही सुन्दर और भव्य रूप से सजाये हुए ये रथ, दिखने में मंदिर के जैसे दीखते हैं और जिस गली में इन्हें खिंच कर यात्रा होती है उस जगह को बडदांड कहते हैं। गुंडीचा मंदिर 2Km है मुख्य जगन्नाथ मंदिर से जहाँ से यह रथ यात्रा शुरू होती है।

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जगन्नाथ मंदिर में हिन्दुओं को ही घुसने की अनुमति है, परन्तु यही वो दिन है जिस दिन हर एक जाती और दुसरे देशों से आये हुए लोगों को भी प्रभु को देखने का मौका मिलता है। विश्व भर से पूरी रथ यात्रा पर आये हुए भक्त और श्रधालुओं की बस एक ही कामना होती है कि उन्हें एक बार प्रभु के रथ को रस्सी से खीचने का मौका मिले।
इस रथ यात्रा के दौरान इतनी भीड़ होती है कि किसी की भी जान जा सकती है परन्तु फिर भी लोग अपनी जान की परवाह किये बिना रथ के रस्सी तक पहुँचते हैं और उसे छु पाना ही जीवन को धन्य समझते हैं।

जगन्नाथ रथ यात्रा के दौरान मनायी जाने वाली परंपराएँ।

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तीनों रथ, जगन्नाथ, बलराम और सुभद्रा के रथ प्रति वर्ष नए बनाये जाते हैं। परम्पराओ के अनुसार इन तीनों रथ को इनके यूनिक तरीके से सजाया जाता जो की सदियों से एक ही प्रकार एक ही रंग में सजाया जाते रहा है. इनकी सजावट वहीँ बडदांड में ही होती है और इनकी लाल रंग का ध्वजा और चमकते हुए पीले, नील, काले रंग को देकते ही आप प्रभु की ओर मोहित हो जायेंगे। इनकी सजावट मंदिर के मुख्य द्वार (सिंह द्वार) जो की मदिर की पूर्व दिशा में है, उस जगह किया जाता है।


जगन्नाथ रथ पूरी यात्रा का इतिहास: History of Jagannath Puri Rath Yatra.


जगनाथ मंदिर का इतिहास अपने आप में  खास है, ऐसा हम इसलिए क्योकि अभी तक जो आप जी ने कथा सुनी है वह सिर्फ एक है लोकवेद है.जबकि क्या यह हम आप को अपने ब्लॉग के माध्यम से अब बताऐंगे।


एक समय की बात है श्री कृष्ण ने पूरी के राजा इन्द्रदमन जी को स्वप्न में दर्शन दिए तथा कुछ इस तरह शब्द सुनाया और कहा:

"अर्ध रात्रि बीत गयी थी, स्वपन में दिखे घनश्याम। इन्द्रदमन एक मदिर बनवादें, जगन्नाथ हो जिसका नाम".

तब उन्होंने मंदिर बनवाना चाहा, परन्तु समुन्द्र ने मंदिर को बनने नहीं दिया। इतिहासकारो का यहाँ तक कहना है की राजा ने ३ बार मंदिर बनवाया था, लेकिन समुद्र ने तीनो बार मंदिर को तोड़ दिया। अब राजा चिंतित हुआ की मंदिर कैसे बने?

Video Credit: WildFilmsIndia.

तभी कबीर भगवांन एक वृद्ध कारीगर का रूप धरके राजा के पास आये और कहा की राजा मै यह मंदिर बनाऊगा, आप मंदिर वाले स्थान के पास मेरा एक चाबूतरा बनवा दो. राजा ने ऐसा ही करा. समुद्र फिर मंदिर को तोड़ने के लिए परन्तु इस बार मंदिर को तोड़ नहीं सका और प्रभु से प्राथना करने लगा की है भगवन मुझे यह मंदिर नहीं बनने देना है, मुझे श्री कृष्ण से त्रेता युग का बदला लेना है. जब इसने मुझे नीच-गुलाम कहा था.

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ऐसा माना जाता है की जब कबीर भगवान् मंदिर का निर्माण कर रहे थे, तब उन्होंने राजा से कहा था की जब तक मैं आज्ञा न दूँ तब तक आप जी इसके (चाबूतरे के) दरवाजे मत खोलना, अन्यथा इसमें जो मूर्ति मैं बना रहा हूँ वह उतनी ही रह जाएगी। इस मंदिर की एक खास बात यह भी होगी की इसमें कोई भी छुआ छात नहीं चलेगी।

परन्तु इसके बावजूद भी एक साधू ने इसके दरवाजे खोल दिए, दरवाजे खोल कर देखा तो पता चला की वहां कोई नहीं है तथा बस एक मूर्ति है, जिसके हाथ पुरे नहीं है.

अधिक जानने के लिए आप यह ब्लॉग भी पढ़ सकते है:  How was the Temple of Shri Jagan Nath built in Puri

तो दोस्तों यह था  जगन्नाथ रथ पूरी यात्रा का इतिहास: History of Jagannath Puri Rath Yatra.


Jagannath Puri Rath Yatra 2019 Quotes & Drawing.


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"जगन्नाथ मंदिर में जाने से कोई लाभ सम्भव नहीं, यह एक सशत्रुनुकूल साधना नहीं है".
जय जगन्नाथ जिसका नाम है,पूरी जिसका धाम है.


जगन्नाथ मंदिर में कोई भी छुआ-छात नहीं है.






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